Aadhunik Shikcha : आधुनिक शिक्षा : समस्याऍ और उनका समाधान : Modern Education Problems And Solutions.

शिक्षा सीखने की वह प्रक्रिया है , जिसके द्वारा हम अपने जीवन को ऊचाइयों की ओर ले जाते है । चाहे किसी भी प्रकार की परिस्थितियां हो ,शिक्षा के द्वारा  उसका हल बहुत आसानी से निकाला  जा सकता है। हमारे व्यक्तित्व में सुधार आता  है औऱ इससे बौद्धिक क्षमता बढ़ती है ।  यह सामाजिक विकास और आर्थिक उन्नति का आधार है । लेकिन क्या हम शिक्षा को सही अर्थो में अपने जीवन के साथ जोड़ कर मानव के उत्थान के रूप में देख पा रहे है या फिर शिक्षा  सिर्फ पैसे कमाने का  साधन ही बन कर रह गयी  है ।

स्वतंत्रता से पूर्व सरकार के विधि सदस्य लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी  शिक्षा का समर्थन किया, उनके अनुसार देश में एक ऐसा वर्ग बनाया जाये, जिससे शासन ठीक प्रकार से किया जा सके । इसके लिए उसने निचले स्तर में नौकरी के लिये अंग्रेजी भाषा को अपनाने का मार्ग बताया । इस प्रकार लार्ड विलियन ने 1837 में अंग्रेजी भाषा को सरकारी भाषा घोषित कर दिया और सरकारी नौकरियों में अंग्रेजी भाषा अनिवार्य कर दी गयी । आज भी अंग्रेजी भाषा को विशेष महत्व दिया जाता है और हम उसके गुलाम बन कर रह गये है । अंग्रेजी भाषा को जानना एक अलग बात है, लेकिन  जब भी कोई चीज हमारी अस्मिता को चोट पहुंचाती  है.तो वह  हमारे लिए घातक है , फिर हमारी राष्ट्रभाषा में सभी गुण   मौजूद है तो हम किसी  और भाषा को सर्वोपरि  महत्व क्यों दे ।

हालाकि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात राष्ट्रीय शिक्षा आयोग(1964) या कोठारी शिक्षा आयोग  के द्वारा शिक्षा नीति में बदलाव देखने को मिला ।दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में सामाजिक बदलाव और अपनी मातृभाषा हिंदी को महत्व दिया गया साथ ही माध्यमिक स्तर पर स्थानीय भाषा को भी प्रोत्साहित किया गया। सबको समान  शिक्षा मिले ,अमीरी और गरीबी की खाई को कम किया जाये । आगे चलकर राष्ट्रीय शिक्षा  आयोग 1968 का गठन हुआ । जो कोठारी आयोग का ही विस्तार माना जा सकता हैं । सरकार द्वारा समय समय पर शिक्षा में सुधार की नीतियों तो तैयार की जाती है, लेकिन वास्तविक स्थिति तो कागज के पन्नों तक ही सिमट कर रह गयी है ।

सरकार द्वारा पूर्ण साक्षरता  का दंभ तो भरा जाता है । लेकिन हकीकत क्या है यह सर्वविदित है. सिर्फ नाम लिख लेना ही  साक्षरता की श्रेणी में नही आना चाहिये । व्यक्तित्व  के विकास के साथ इसको जोड़कर परिभाषित किया जा सकता है। ।

सरकारी स्कूल और पब्लिक स्कूलों में कही भी समानता नही दिखायी देती । इन संस्थाओं में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई  स्पष्ट देखी जा सकती है । प्राइवेट स्कूलों की फीस इतनी अधिक हो गयी है कि आम आदमी इससे कोसो दूर होता जा रहा है । दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के चलते सरकारी  स्कूलों का विकास नही हो पा  रहा है । अध्यापको की कोठियों और बैंक बैलेंस से इनको देखा जा सकता है । शिक्षा संस्थान आज व्यवसायिक केंद्र बनकर रह गए है ।

स्वार्थ और दिखावे में उलझ आज का छात्र पर्यावरण जैसे मुद्दे पर मूकदर्शक बना रहता है । प्रकृति से लगाव खत्म होता जा रहा है।
इंजिनियरिंग ,मेडिकल, जैसे संस्थानों  में  शोषण,आत्महत्या और बलात्कार जैसे वारदातो की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है । त्याग ,तपस्या ,आध्यात्मिक मूल्यों का ह्रास होता जा रहा है। स्पष्ट है कि दर्शनशास्त्र ,साहित्य ,संस्कृत और नैतिकशास्त्र जैसे विषयो के प्रति हीन दृष्टिकोण और व्यवहारिक स्तर में चलन का  ना हो पाना । इन विषयों को सरकार द्वारा प्रोत्साहित करके ही इन समस्याओ को दूर किया जा सकता है।
आज पाश्चात्य शिक्षा  का अंधानुकरण हो रहा है ,वाहय चमक दमक के सामने हमारी संस्कृति फ़ीकी नजर आती है । जातिवाद के बंधन ने  शिक्षा को भी नही छोड़ा है । आरक्षण जैसे मुद्दे फिर हावी होने लगे है । वोट के खातिर नेताओं को ऐसे मुद्दे उठाने में समय नही लगता है । फिर उसकी आग में सभी जलते है । इस मुद्दे पर सरकार समय समय  पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत करती दिखायी तो देती है, लेकिन आज तक इसका हल नही निकल पाया ।

कई राज्यो में तो नकल आम बात हो गयी है।  जहाँ पेरेंट्स स्वयं बच्चों को  नकल करवाने के लिए प्रेरित करते  है।  अनुशासन के अभाव में सामाजिक ढाचा जैसे चरमरा गया है । यदि इनको सख्ती से रोका न गया तो समस्या और गंभीर हो सकती है ।

बच्चो को मनोवैजानिक द्रष्टि से उनका आकलन और  विश्लेषण करके उनके क्षेत्र का निर्धारण किया जा सकता है। जिस भी विषयो में बच्चो की रूचि हो ,उस पर उसे पूर्ण  निर्णय लेने दे साथ ही घर के माहौल को बिगड़ने न दे। क्योकि पति पत्नी के झगड़े से बच्चो पर इसका बुरा असर पड़ता है । आज के इस एनीमेशन और स्मार्ट एजुकेशन के दौर में योग और अनुशासन के समन्वय से ही शिक्षा के  सही अर्थो को पहचाना जा सकता है। अपनी  शिक्षा को आध्यत्मिक और अपनी संस्कृति  के साथ जोड़कर  ही  आधुनिक शिक्षा  का विकास किया जा सकता है ।

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6 comments

  1. Babita Singh says:

    आपने बिल्कुल सही कहा शिक्षा ही एकमात्र साधन है जिससे व्यक्ति के अन्दर छिपी शक्तियो को बाहर लाया जा सकता है । इसलिए आधुनिक शिक्षा का बेहतर होना बहुत जरुरी है । धन्यवाद Neeraj जी इस बढिया लेख को शेयर करने के लिए ।

  2. admin says:

    thanks you Babita ji

  3. kumar says:

    bahut badhiya lekh mera manna h ki agar padhai ke sath sath projector par subject ko display kiya jaye to samjhne me 80% madad milti h. technique ka istemal karte rahna chahiye

  4. कुमार जी ,सही कहा आपने आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके शिक्षा को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

  5. प्रिया says:

    ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिये जो छात्रों का सर्वांगीण विकास करे। छात्रों को नैतिक शिक्षा भी प्रदान करें।

    1. आपने सही कहा प्रिया जी ।

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