Corona-virus in hindi :कोरोनावायरस इन हिन्दी

चीन के वुहान शहर से उत्पन्न होने वाला कोरोनावायरस 2019-n CoV,आज पूरे विश्व मे फैल गया । अबतक लगभग 25 देशो में इसके संक्रमण के प्रकोप सामने आए है । मुख्य रूप से थाईलैंड ,सिंगापुर,दक्षिण कोरिया, अमेरिका ,मलेशिया ,फ्रांस ,जर्मनी ,जापान ताइवान , संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम इसकी चपेट में आ चुके है । 5 जनवरी 2020 में  चीन में  इससे मरने वालो कि संख्या 500 के ऊपर पहुँच चुकी है । अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजो की संख्या लगभग 28000 के ऊपर  है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे पहले ही एमरजेंसी घोषित कर दिया है ।

कोरोनावायरस (2019-n CoV) क्या है :

कोरोनावायरस

कोरोनावायरस

2019 के मध्य दिसंबर में बहुत से लोगों को बिना किसी कारण के निमोनिया होने लगा । इसमे अधिकतर लोग  हुआँन सी फूड मार्किट में जीवित पशुओं का व्यापार भी  करते है । इस मार्केट में मछली के साथ ही लोमड़ी मगरमच्छ, भेड़िया, साँप मोर ,साही ,चमगादड़ जैसे 122 आइटम मिलते है । इन्ही जंगली जीव और समुंद्री जीव में वायरस संक्रमित होते है और उनसे वे इंसानो में प्रविष्ट हो जाते है ।इसके बाद वे एक इंसान से दूसरे इंसानो में संक्रमित हो के फैल जाते है । चीनी वैज्ञानिको  ने कोरोनावायरस 2019-n CoV एक नयी नस्ल की पहचान की । इस नए वायरस में कम से कम से 70 % वही जीनोम अनुक्रम थे  जो सार्स कोरोनावायरस में पाए गए थे । इससे पहली मौत 9 जनवरी 2020 में पुष्टि हुई ।

कोरोना वायरस की उत्पत्ति :

कोरोनावायरस को पहली बार चीन में इसकी पुष्टि की गई । इस तरह का वायरस पहली बार मिला अतः इसे नावेल भी कहा गया है ।  कोरोनावायरस की संरचना (crown) क्राउन शब्द से लिया  गया है जिसमें कीले होती है ।

कोरोनावायरस के लक्षण :

यह  ऐसा वायरस है जो जुकाम ,बुखार, साँस लेने में तकलीफ गले में खराश ,नाक बहना जैसे सामान्य लक्षण से प्रारम्भ होता है । इसके साथ ही यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण द्वारा फैलता है ।

क्या चीनी समान छूने से  कोरोनावायरस फैल सकता है :

अबतक ऐसे सबूत नही मिले है । लेकिन चीन में  2003 में सार्स नामक कोरोनावायरस का सामना किया था । जिससे 700 से ज्यादा लोगो की  मौत हुई थी । अगर  किसी चीज या जगह  को छूते है जहाँ पर संक्रमित व्यक्ति के छीकने या खाँसने से वायरस पहुँचा हो तो आप उस वायरस से संक्रमित हो सकते है ।जुकाम के वायरस इंसानी शरीर के बाहर 24 घण्टे तक जिंदा तक रहते है । हालांकि कोरोनावायरस के दिनों तक इंसान शरीर के बाहर भी जिंदा रह सकते है । वैसे अभी तह यह देखा गया है कि इससे संक्रमित व्यक्ति के द्वारा ही संक्रमण दूसरे व्यक्ति को होता है ।

कोरोनावायरस से बचाव :

इस वायरस की अभीतक कोई वैक्सीन नही बनी है । विश्व के बहुत से शोधकर्ता इसके वैक्सीन बनाने में जुटे हुए है ।
हांगकांग के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोनावायरस को लेकर हालात बहुत ही गंभीर हो चुके है। जन सामान्य को यह सूचित किया गया है कि जैसे गला सूखता है तो लगातार पानी पिये । क्योंकि गला सूखने से वायरस तेजी से शरीर मे प्रवेश करते है । पानी थोड़ा थोड़ा करके लेने से इससे बचा जा सकता है ।

-मुँह पर मास्क पहनने की सलाह दी गयी ।

-मसालो का प्रयोग कम करे । विटामिन युक्त पदार्थ ले जैसे नीबू,संतरा आदि ।

इसके साथ ही कुछ सावधानियां बरतने पर भी जोर दिया गया है । जैसे -अपने हाथों को साबुन से धोये । अल्कोहल आधारित हैंड रब का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ।

-खाँसते और छीकते  समय नाक और मुँह पर रुमाल या टिशू पेपर से  ढककर रखें ।

-अंडे और मांस के सेवन से बचे  । सी फ़ूड का सेवन न करे । जंगली जानवरों के सम्पर्क में आने से बचें ।

भारत मे कोरोनावायरस :

भारत इस मामले में पूरी तरह सतर्कता बरत रहा है । सरकारी एजेंसिया पूरी तरह से तैयार है । सिप्ला और अरबिंदो  दो कम्पनियां है जो एंटीरेट्रोवाइरल की सप्लाई करती है । जरूरत पड़ने पर वे पूरी आपूर्ति करने को तैयार है सबसे पहले भारत केरल में तीन मामलो की पुष्टि हुई है ।
भारत मे केरल में इसके तीन मामले चीन के वुहान शहर से आये छात्रो में  इसकी पुष्टि हुयी है । केरल को राज्य आपदा घोषित कर दिया गया है । उत्तर भारत मे भी इसका खौफ दिख रहा है । कानपुर में दो,मेरठ में तीन और बलरामपुर में एक को स्पेशल वार्ड में भर्ती कराया गया है । इसके साथ  बिहार में दो, जयपुर में तीन और पंजाब के फरीदकोट में एक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है ।

आज विकास की इस दौड़ में पर्यावरण और वन्यजीव जंतुओं का जिसप्रकार से दोहन हो रहा है । हम विनाश के इस दौर को भी नही देख पा रहे है । विकास और विनाश के बीच की सीमा रेखा को पहचान नही पाते ।अपनी अर्थव्यवस्था को उच्चतम बिंदु तक ले जाने की होड़ में  इंसानियत को पीछे छोड़ आते है । कोरोनावायरस जैसे विनाश इंसान को ही अपना भक्षण बना लेते है और समूचे विश्व और मानवता को उसकी कीमत चुकानी पड़ती है ।

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