पंचतंत्र की कहानियां : PANCHATANTRA STORIES IN HINDI

पंचतंत्र की कहानियां : PANCHATANTRA STORIES

नीतिगत कहानियों में पंच तंत्र की कहानियां सबसे अधिक विश्व में प्रसिद्ध हुयी । शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होगा जिसने बचपन में पंचतंत्र की कहानियां सुनी या पढ़ी न होगी । विश्व के 50 से भी ज्यादा भाषाओं में इनका अनुवाद हो चुका है । व्यवहारिक जीवन में ये कहानियां एक नया सन्देश देती है । जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों में भी यह कहानियां सकारात्मक सोच उत्पन्न करती है ।
पंचतंत्र कहानियों का उद्देश्य क्या था ? कहां से शुरू हुई ,इसकी भी कहानी बड़ी दिलचस्प है । लगभग 2000 वर्ष पूर्व भारत में अमरशक्ति नाम का राजा था । वह बहुत ही दयालु और उदार था । उसके तीन पुत्र बहुशक्ति,उग्रशक्ति और अनंत शक्ति थे । राजा जितना सह्रदय और सदाचारी था उसके पुत्र उतने ही घमंडी और अत्याचारी थे । अतः राजा अपने पुत्रो को लेकर बड़े चिंतित थे ।
उनके दरबार में एक से बढ़कर एक योग्य मंत्री ,सेनापति और आचार्य थे । उनके परामर्श पर ऋषी मुनियों और आचार्यो की उसने एक सभा बुलाई । उनके सामने अपनी समस्या रखी । उस समय के प्रतिष्टित पण्डित विष्णु शर्मा ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया । वे राजा के पुत्रों को अपने आश्रम ले आये । उन्होंने राजा के पुत्रो को नीतिपरक , ज्ञानवर्धक और व्यवहारिक शिक्षा दी । पंडित विष्णु शर्मा ने प्रकृति को आधार बनाया और पशु पंछियो को प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया । इससे राजा के पुत्रों का जीवन ही बदल गया । वे एक कुशल और योग्य शासक बने । बाद में पंडित विष्णु शर्मा ने उन्ही संदर्भो को संकलित किया । जो पंचतंत्र की कहानियों के नाम से जानी जाती है ।
आज के परिवेश में भी हम पंचतंत्र की कहानियों से शिक्षा और नीतिपरक बाते जान सकते है। अपने समस्याओं का समाधान कर सकते है ।
तो आइये दोस्तों इनकी रोचक कहानियों को जाने ;

बगुला भगत और केकड़ा :
एक जंगल में बड़ा तालाब था । उसमे अनेक प्रकार के जीव जंतु रहते है । जैसे मछलियां, केकड़े , बत्तख़, सारस आदि । इसी तालाब में एक बूढ़ा बगुला रहता था । अब वह भोजन के लिये ज्यादा दौड़- धूप नही करना चाहता था । वह आराम से रहना चाहता था । अतः उसने एक युक्ति सोची और एक योजना बनाई । वही तालाब के किनारे रोनी सूरत बनाकर एक पैर पर खड़ा हो गया । वहां उपस्थित केकड़े ने जब बगुला भगत से पूछा कि मामा आप दुखी लग रहे हो क्या बात है ? बगुले भगत ने कहा कि वह अब किसी की भी जान नही लेना चाहता ।वह आगे पाप नही करना चाहता ।अब वो यही पर भूखा रह कर प्राण त्याग देगा । वैसे भी 12 साल तक यहाँ सूखा पड़ेगा ।कुछ ही दिनों में यहां का पानी सूख जायेगा ।सभी को मरना है । केकड़े ने बगुला भगत से पूछा की आपको यह किसने बताया ?बगुला भगत बोला ,मुझे महान तपस्वी और भविष्यवक्ता ने यह बात बताई है ।
केकड़े ने सभी जीव् जन्तु को यह बात बता दी। जिससे सभी परेशान हो गए । सभी मिलकर बगुला भगत के पास आये और उससे विनती करने लगे कि इस मुसीबत से कैसे निकला जाये । अब तो आप ही कोई उपाय बताओ। अब तो आप तपस्वी और भक्त हो गए हो ।बगुला भगत को अपनी योजना सफल होती दिखाई दे रही थी । उसने कहा कि पास में ही एक झील और झरना है ,वहां हमेशा पानी रहता है । वह कभी भी नही सूखता है ।उसका पानी भी मीठा है । मै तुम सभी को अपने पीठ पर बैठाकर पहुँचा दूँगा । इस प्रकार तुम लोग सुरक्षित  वहां पहुँच कर आराम से रहना । सभी ने बगुला भगत की बात मान ली । रोज एक जीव को वह ले जाता था । थोड़ी दूर ले जाकर वह उनको पत्थर में पटक कर मार देता और उन्हें अपना भोजन बना लेता । कुछ दिनों के बाद ही बगुला भगत का चेहरा चमक गया । सभी यह सोचने लगे कि अच्छे कर्मो की वजह से बगुले भगत में यह तेज और चमक विकसित हो गयी है । केकड़े ने कहा, ‘मामा मुझे कब झील ले चलोगे ।’ आज तुझे ही ले चलते है । केकड़ा बहुत ही खुश था । जब वह उस टापू के पास पहुँचा तो उसने देखा कि कई मछलियो और जीवो की हड्डियां पड़ी है । केकड़े को अब बगुले की नियत का पता चल चुका था । बिना देर किये ही केकड़े ने बगुला भगत की गर्दन अपने पंजे से मरोड़ दी और तब तक नही छोड़ा जब तक की वह मर नही गया ।
इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है क़ि अपनी बुद्धि और विवेक से काम लेना चाहिए । किसी की चिकनी चुपड़ी बातों में नही आना चाहिए ।अन्यथा बहुत भारी नुकसान चुकाना पड़ सकता है ।
इस प्रकार के कई Fraud तो आज भी देखने को मिलते है । गलत और झूठे कमिटमेंट Commitment करके लोग भारी रकम ऐठ लेते है । जो भी उनकी बातो में फंस जाता है ,वह बाद में बहुत पछताता है ।
यदि किसी कारण से किसी मुसीबत में फंस भी जाये तो अपना धैर्य नही खोना चाहिए । बल्कि विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करना चाहिए ।
नेवला और साँप :
उज्जयनी के पास एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहती थे । उनके एक छोटा बच्चा था ।
उन्होंने एक नेवला पाल रखा था । नेवला बच्चे के साथ खेलता था । ब्राह्मणी नेवला और बच्चे का बहुत ख्याल रखती थी ।
एक दिन ब्राह्मणी पानी भरने के लिए बाहर गयी । जाते समय उसने ब्राह्मण को बच्चे का ख्याल रखना कह कर चली गयी । अचानक पण्डित जी का बुलावा आ गया और वो भी पूजा पाठ के लिए घर के बाहर निकल गए । घर में सिर्फ उनका छोटा बच्चा और नेवला बच गए ।
थोड़ी देर बाद एक साँप पीछे से आ गया । साँप बच्चे की और बढ़ रहा था । तभी नेवले ने साँप को देख लिया फिर क्या था ! साँप वैसे भी नेवले का दुश्मन होता है । देखते ही देखते नेवले ने साँप के टुकड़े टुकड़े कर डाला और साँप को मार दिया । नेवला बहुत ही खुश था की उसने बच्चे की जान बचाई । उसके मुँह पर खून का निशान लगा था । नेवला घर के द्वार पर ब्राम्हणी का इन्तजार कर रहा था । ब्राह्मणी जब घर लौटीं तो नेवले के मुँह पर खून देख कर उसके होश उड़ गए । उसने सोचा कि नेवले ने बच्चे को काट खाया है । पानी से भरी गगरी उसने नेवले के मुँह पर मार दी । जिससे नेवला बिचारा वही मर गया । इसके बाद ब्राह्मणी जब अंदर घुसी तो उसने देखा कि बच्चा जमीन पर खेल रहा है और साँप मरा पड़ा है । उसको बहुत पछतावा हुआ कि नेवले ने उसके बच्चे की जान बचायी । इसीलिये तो कहते है :

बिना बिचारे जो करे ,सो पाछे पछताय ।
काम बिगाड़ो आपनो जग में होत हंसाय।।

7 comments

  1. Anshu says:

    Bahut achi story k sath aapne aaj ki sachaiyo se awgat karaya ha.

  2. N.L.S. says:

    Bahut Achi Khani Hai

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