Essay On Mahatma Gandhi In Hindi : महात्मा गांधी पर निबंध

भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक और आध्यात्मिक प्रणेता के रूप में महात्मा गांधी जी का नाम स्वतन्त्रता दिलाने में मुख्य रूप से लिया जाता है । एक तरफ उन्होंने सत्य और अहिंसा को अंग्रेजो के विरुद्ध शस्त्र के रूप में अपनाया तो दूसरी ओर समाज में फैली बुराइयों जैसे अस्पर्शयता ,जमींदारी व्यवस्था और रूढ़िवादिता को दूर करने का प्रयास किया । ‘बुरा मत देखो’, ‘बुरा मत सुनो ‘और’ बुरा मत बोलो’ जैसे स्लोगनआज भी कारगर है । गांधी जी ने ‘सादा जीवन उच्च विचार  ‘को  जीवन में आत्मसात किया और व्यवहारिक जीवन में उसे सार्थक किया । उनके द्वारा बताये हुए रास्ते पर चलकर सफलता के नए आयाम स्थापित किये जा रहे है । चाहे वह अन्नाहजारे जी का सत्याग्रह हो या मोदी जी का स्वच्छता अभियान हो ।
जन्म और  बचपन : महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 गुजरात के पोरबन्दर नामक स्थान पर हुआ था । उनका पूरा नाम मोहन दास  करम चंद्र गांघी था। उनके पिता करमचंद्र गाँधी पोरबंदर के दिवान थे । उनकी माता पुतलीबाई वैश्य धर्म की थी।  बचपन में उन्होंने ‘राजा हरिशचंद्र’ नाटक देखा और वे उससे बहुत अधिक प्रभावित हुए । राजा हरिशचंद्र के सत्य और आदर्श को ही अपने जीवन में अपनाने  कोशिश की ।
मई 1888 तेरह वर्ष की आयु में उनका विवाह कस्तूरबा माखन  के साथ हुआ। शैक्षिक स्तर  में वे एक औसतन स्टूडेंट रहे।  लेकिन  बहुत ही ईमानदारी से अपने पढ़ाई  करते  थे।  एक बार परीक्षा में एक प्रश्न का उत्तर पूरे क्लास को नहीं आ रहा था। कई स्टूडेंट ने चीटिंग करके सही उत्तर दे दिया । लेकिन गाँधी जी ने बिना चीटिंग किये ही उत्तर दिया। उनका उत्तर गलत था और वे उस परीक्षा में असफल रहे।  कहने का तात्पर्य ये है अपने जीवन में सच्चाई को  ही उन्होंने सर्वोपरि माना ।
युवावस्था :गाँधी जी में 1888 में कानून की पढ़ाई लन्दन से   प्राप्त की । 1893  में वे दक्षिण अफ्रीका  वकालत के लिए गए ।  दक्षिण अफ्रीका में गाँधी  जी को भारतीयों पर अंग्रेजो के भेदभाव का पता चला।
गांधी जी  ने स्वयं प्रथम श्रेणी कोच का टिकट लेने के बावजूद उन्हे तीसरे श्रेणी के डिब्बे मे जाने के लिए कहा गया । गाँधी जी के इन्कार करने पर उन्हे बेइज्जत करकेे डिब्बे के बाहर फेक दिया गया । वहाँ के कई होटलो में पैसे खर्च करने के बाद भी Entry नही मिलती थी । अदालत में उन्हे पगड़ी पहनने की इजाज़त भी नही थी । इन सब घटनाओं ने गाँधी जी को अंदर से झकझोर के रख दिया । उन्होंने सामाजिक न्याय और देश में भारतीयों के सम्मान के लिये आवाज उठायी ।
आज़ादी में योगदान : 1915 में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट आये । भारत में आकर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से प्रभावित थे । उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिज्ञ गुरु माना ।




गांधी जी ने भारत आकर अंग्रेजो की नीतियों का विरोध  किया ।उस समय अपना  देश जमींदारी प्रथा ,छुआछूत और पर्दाप्रथा जैसी बुराइयों से  जूझ रहा था ।उसके ऊपर अंग्रेजों के द्वारा लागू मनमानी कर व्यवस्था से आम आदमी असहाय और परेशान था । उन्होंने ने चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह आंदोलन के द्वारा इनको दूर काने का प्रयास किया । खेड़ा में एक आश्रम की स्थापना की ।  । पश्चिमी शैली के वस्त्रों का त्याग किया भारत के सबसे गरीब इंसान के द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रो को अपनाया । घर से बने कपड़े( खादी) कीे  वकालत की   । बाद में उन्होंने चरखा को राष्ट्रीय ध्वज में शामिल किया । उन्होंने  कार्यकर्ताओं को संगठित किया । ऐसे में गाँधी जी का मुख्य उद्देश्य देश की आधारभूति समस्याओं से देश जो निजात दिलाना था । लेकिन अंग्रेज़ो को यह उचित नही लगा । उन्होंने गांधी जी को गिरफ़्तार कर लिया । इसका पूरे भारत में विरोध हुआ । इसके बाद गांधी जी एक जननायक बन कर उभरें । सरदार बल्लभ भाई पटेल और गाँधी जी ने मिलकर देश के किसानों का नेतृत्व किया । उनको भारी करो से मुक्ति दिलाई । गांधी जी ने असहयोग ,अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध को ही अपना शस्त्र बनाया ।



अंग्रेजो द्वारा जलियांवाला बाग़ नरसंहार (1919 )से बहुत आहत थे ।1921 में गाँधी जी को भारतीय कांग्रेस का अधिकारी नियुक्त किया गया । इसमें गांधी जी ने मूलभूत सुधारो पर जोर दिया ।स्वदेशी नीति पर बल दिया । विदेशी वस्त्रो का बहिष्कार किया । खादी वस्त्र पहनने  पर जोर दिया । विदेशी शिक्षा और  नौकरियों का विरोध किया । इसका परिणाम यह हुआ कि जन-जन में अंग्रेजो का विरोध होने लगा था । असहयोग आंदोलन अपने चरम पर था । तभी 1922 में चौरा -चौरी ट्रेन के हिसात्मक घटनाओं  के कारण गांधी जी ने यह आंदोलन वापस ले लिया । हालांकि गांधी जी समेत कई नेताओं को देशद्रोह के आरोप में जेल में डाल दिया गया था । लेकिन दो साल बाद मेडिकल ग्राउंड पर गाँधी जी को छोड़ दिया गया ।



1928 में  गांधी जी ने कलकत्ता अधिवेशन में एक प्रस्ताव रखा । जिसमें भारतीय साम्राज्य को सत्ता प्रदान करने के लिए कहा गया । ऐसा न करने पर अंग्रेजों को असहयोग आंदोलन का सामना करने के लिए चेताया । अंग्रेजों का कोई जवाब न आने की स्थिति में 31 दिसंबर 1929 में  लाहौर में भारत का झंडा फहराया गया । 26 जनवरी 1930 में  भारतीय कांग्रेस ने स्वतन्त्रता दिवस मनाया ।
इसके उपरान्त गाँधी जी ने नमक पर कर (Tax) का विरोध किया । एक नया सत्याग्रह चलाया 12 मार्च से 6 अप्रैल तक 400 km तक अहमदाबाद से दांडी तक की यात्रा शुरू की । बड़ी संख्या में लोगो ने इस आंदोलन में शामिल हुए । यह आंदोलन सबसे ज्यादा अंग्रेजों को विचलित करने वाला आंदोलन था । इसमें लगभग 80 हजार लोगोँ को जेल में डाल दिया गया । समस्त भारत में आजादी के संघर्ष की लहर साफ देखी जा सकती थी ।
1942 में गांधी जी ने अंग्रेज भारत छोड़ो आंदोलन को शुरू किया । भारतीयो के लिए यह  सबसे प्रभावी और शक्तिशाली आंदोलन रहा । इस आंदोलन को अंग्रेज़ो ने पूरी तरह दबाने का प्रयास किया । बड़ी संख्या में हिंसा और गिरफ्तारियां हुयी । हजारो स्वतन्त्रता सेनानियों को गोलियां मारी गयी। साथ की विश्व युद्ध में अंग्रेजो का साथ न देने का भी निर्णय लिया गया । गांधी जी के सब्र का बांध भी टूट गया और उन्होंने अहिंसा और अनुशासन के साथ  ‘करो या मरो’ (Do or Die )का नारा दिया ।  9 अगस्त 1942 को गाँधी जी समेत सभी कांग्रसियो और प्रमुख स्वतन्त्रता सेनानियों को गिरफ्तार कर लिया गया । गांधी जी को पुणे के आगा खां पैलेस में बंदी बना कर रखा गया । इन दिनों गांधी जी को कई विपत्तियों का सामना करना पड़ा । 22 फरवरी 1944 को कस्तूरबा गांधी का निधन हो गया था । इसके कुछ दिन बाद गांधी जी को भी मलेरिया हो गया । जिससे उनका स्वास्थ्य बुरी तरह गिर गया । ऐसे में अंग्रेज़ो ने उनको रिहा कर दिया । भारत छोड़ो आंदोलन से एक बात तो एकदम स्पष्ट हो गयी थी कि अंग्रेजों ने भारतीयो के हाथ में सत्ता सौपने का मन बना लिया था । गाँधी जी ने यह आंदोलन बंद कर दिया और बदले में 1 लाख लोगों को जेल से रिहा कराया गया ।
1946 में कैबिनेट मिशन ने एक प्रस्ताव रखा ।जिसमे देश का विभाजन और स्वतन्त्रता दोनों शामिल था ।गाँधी जी इसके खिलाफ थे । वे भारत का विभाजन नही चाहते थे । लेकिन मुस्लिम लीग अपना अलग राज्य स्थापित करना चाहते  थे । उस समय हिन्दू और मुस्लिमो के दंगो ने विकराल रूप ले लिया था । लाखो की संख्या में आम व्यक्ति मारे जा रहे थे । परिस्थियों को देखते हुए सरदार बल्लभ बाई पटेल ने गांधी जी को समझाया और उनकी स्वीकृत के साथ ही हिन्दुस्तान और पाकिस्तान आज़ाद हुए । आजाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शपथ ग्रहण की ।उधर मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की बागड़ोर सम्भाली।
अंतिम समय : 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गयी, जब वे शाम को प्रार्थना करनेे नई दिल्ली के  बिरला भवन जा रहे थे। नाथू राम गोडसे ने पहले उनके पैर छुए फिर सामने से बैरटा पिस्तौल से तीन गोली दाग दी । उस समय गांधी जी अपने अनुयायियों से घिरे हुए थे ।  उनके मुख से   ‘हे राम ‘शब्द निकला । गाँधी जी की हत्या करने वाला नाथू राम गोडसे एक हिन्दू महासभा का सदस्य था । वह गाँधी जी की विचारधारा का विरोधी था । नाथूराम गोडसे और उसके सहयोगी नारायण आप्टे को 15 नवम्बर को फाँसी की सजा दे दी गयी । गांधी जी की समाधि दिल्ली के राजघाट में स्थित है ।
सफल लेखक : गाँधी जी एक सफल लेखक भी थे । उन्होंने कई पत्रों का संपादन भी किया । इंडियन ओपिनियन,हरिजन, यंग इंडिया आदि मुख्य है । ‘नवजीवन’ नामक मासिक पत्रिका का भी सम्पादन किया । उनकी प्रमुख किताब जो की उनकी आत्म कथा पर आधारित है’ एक आत्म कथा या स्वयं के साथ मेरा प्रयोग ‘(An Atobiography or My experiment with Truth ) . उन्होंने जान रस्किन की ‘आनटू दिस लास्ट’ (Onto This Last)  की गुजराती में व्याख्या की ।
कई लेखको ने भी गाँधी जी के जीवन पर कार्य किया है उसमे मुख्य हैं ; डी जी तेंदुलकर ने अपने महात्मा के साथ ,मोहनदास करम चंद्र आठ खंडो में । महात्मा गांधी के साथ प्यारेलाल और सुशीला नायर 10 खंडो में है ।
उपलब्धि और विचार :संयुक्त राष्ट्र महासभा  ने 15 जून 2007 को गांधी जयंती ( 2 अक्टूबर ) को ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस ‘के रूप में मनाते है । सुभाष चंद्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता सम्बोधित करते हुए आजाद हिन्द फ़ौज के सैनिको के लिए उनका आर्शिवाद और शुभकामनाये मांगी थी । दक्षिणअफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला गांधी जी से बहुत प्रभावित थे । वैज्ञानिक आइंस्टीन ने गांधी जी को “आने वाली पीढ़ियों ‘का आदर्श कहा । 1930 में टाइम्स मैगजीन ने ‘वर्ष का पुरुष ‘नाम दिया । 1996 में भारत सरकार ने Rs. 1,5,10,20,50,100,500 ,1000 के अंकन के रूप मे आरम्भ किया । आज जितने भी नोट  इस्तेमाल किये जाते है , उन पर महात्मा गाँधी के चित्र है । गांधी जी की प्रतिमाये विश्व के अनेक स्थानों में जैसे यूनाइटेड किंगडम में स्थित है ।30 जनवरी को यहाँ ‘राष्ट्रीय स्मृति  दिवस’  के रूप में मनाया जाता है ।
गांधी जी के अनुसार ,’सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ने के लिए अपने दुष्टात्माओं ,भय और असुरक्षा जैसे तत्वों पर विजय प्राप्त करना चाहिए ।’
गांधी जी सभी धर्मो का आदर करते थे । हिंदूधर्म के बारे में वे कहते है कि ‘यह मेरी आत्मा को संतुष्ट करती है । सारी कमियो को पूरा करती है । जब मुझे संदेह घेर लेता है और जब निराश मुझे घूरने लगता है । मुझे आशा की किरण नही नजर आती । तब मै भगवत गीता को पढ़ लेता हूँ और तब मेरे मन को असीम शांति मिलती है ।’
उनके अनुसार विश्व के सभी धर्म भले ही और चीजो में अंतर रखते हो ,लेकिन सभी इस बात पर एकमत है क़ि दुनिया में कुछ नही बस सत्य जीवित रहता है ।

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