दुविधा कैसे दूर करे : How to Deal With Dilemma In Hindi :


जब भी हम जीवन मे किसी लक्ष्य का निर्धारण करते है तो मन मे कई प्रश्न आते है यह कार्य करू या ना करु । पता नही मैं अपने लक्ष्य में सफल होंगे या नही?हम कौन सा विकल्प चुने ? संत कबीर ने कहा है कि ‘दुविधा में दोनों गए माया मिली न राम’ वैसे देखा जाए तो दुविधा हर व्यक्ति के जीवन मे आती है । लेकिन जो व्यक्ति दुविधा को जितनी जल्दी दूर करते है । वे अपने लक्ष्य के ज्यादा करीब होते है । दुविधा में फंसकर जब हम निर्णय नही ले पाते तो हमारे काम रुक जाते है । मन मे असमंजस की स्थिति रहती है । इससे कभी कभी तो व्यक्ति हींन भावना से ग्रसित हो जाते है और वे डिप्रेशन में चले जाते है । आइये इसको दूर करने के उपाय जानते है ।


अपने मन को शांत रखे :

जब भी दुविधा की स्थिति आये तो सबसे पहले मन को शांत करे । अपनी दुविधा में मौजूद विकल्प के फायदे और नुकसान को नोट करें और पॉइंटवाइस तुलना करें । इसमे जो उचित निर्णय हो उसे चुने और जोश और लगन से उस कार्य मे लग जाये ।

दुविधा की स्थिति में तुरंत निर्णय ले :

दुविधा के विकल्प के चुनने में ज्यादा समय न लगाए । अपने निर्णय को कल पर टाले नही । दो टूक निर्णय ले और अपनी दुविधा को दूर करे । जैसे यदि आपको कोई जॉब का ऑफर आता है तो उसका समाधान मौजूदा जॉब से तुलना करके निर्णय जल्दी ले । क्योकि असंमजस की स्थिति में समय  खराब होता  है और ऐसे में जहां आप जॉब कर रहे हो वहां भी ठीक ढंग से काम नही कर पाते ।


अपने किसी खास व्यक्ति से सलाह ले :

जब कुछ भी समझ मे ना आ रहा हो तो जिसे आप यह समझते हो कि वह आपको अच्छी सलाह दे सकता है । आपके गुरु, पेरेंट्स,पत्नी,दोस्त, भाई  या कोई रिश्तेदार भी हो सकता है । उसकी सलाह लेकर अपने डिसीजन आप ले सकते है । किसी के दबाव में निर्णय न ले । यदि आपका मन उस निर्णय को स्वीकार करे तभी आप ऐसे निर्णय ले ।

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अपने कर्म पर फोकस करे :

जब भी कभी आप अपने लक्ष्य को निर्धारित करते है तो सर्वप्रथम अपने कर्म पर फोकस करे । कार्य कितना भी मुश्किल हो यदि आप धर्म के रास्ते पर चलेंगें तो  सफलता अवश्य मिलेगी ।
महाभारत के युद्ध मे अर्जुन के सामने भी दुविधा की स्थिति आ गयी थी जब युद्ध के मैदान में अपनो के सामने वे निर्णय नही ले पाए कि युद्ध करे या ना करे । श्री कृष्ण ने उनकी शंका का समाधान किया और वे फिर युद्ध करने को  तैयार हुए ।

आत्म निर्भर बने : 


जीवन मे कोई भी कार्य हो कोशिश यही करना चाहिए निर्णय खुद ही ले । किसी दूसरे पर डिपेंड होकर कार्य को नही लेना चाहिए । जैसे यदि 10th के बाद कौन से स्ट्रीम ले? साइंस ले या कामर्स या फिर आर्ट के विषय ले । ऐसे में अक्सर विद्यार्थी कंफ्यूज रहते है । अपने आप को सबसे ज्यादा आप जानते हो अतः आत्म निर्भर बने आपका जिस सब्जेक्ट में मन लगता हो उस विषय का चुनाव करे । यदि पेरेंट्स का आपके विकल्पों के साथ विचार मैच करता है तो ठीक है अन्यथा उनको अपने तर्कों द्वारा  कन्विंस करे कि वह अमुख विषय क्यों लेना चाहता हूँ ।

उपयुक्त  सुझावों के माध्यम से दुविधा को दूर किया जा सकता है ।आप अपने लक्ष्य की ओर अपना ध्यान केंद्रित करे और ईमानदारी से मेहनत करे । इसमे कोई संदेह नही है कि सफलता निश्चित ही आपको मिलेगी ।


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