जन्माष्टमी पर निबंध : Essay On Krishna Janmashtami

जन्माष्टमी पर निबंध : Essay On Krishna Janmashtami

 संसार में जब -जब निरीह प्रजा और साधु संतों पर अत्याचार और शोषण हुआ है  । तब- तब  उनके पापों का नाश करने के लिए किसी महान विभूतियों और भगवान ने जन्म लिया है । ऐसे ही समय में भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के अवतार रूप में जन्म  लिया।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म श्रावण मास की भाद्रपक्ष के कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था  । इस दिन को देश और विदेशों में बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ जन्माष्टमी के रूप  मनाया जाता है

हर माँ को अपने पुत्र के बाल्यावस्था में अनायास ही कभी न कभी कान्हा के रूप का दर्शन हो ही जाता है । जिससे वो अपने आप को धन्य समझतीं है । कृष्ण की बाललीलायें , राधा कृष्ण का प्रेम किसको आकर्षित नही करता ? 

जन्म की कथा

मथुरा में कंस नाम का एक अत्याचारी राजा था । प्रजा उसके आतंक से त्रस्त थी । एक दिन वह अपनी बहन देवकी को उसके ससुराल छोड़ने जा रहा था । तभी एक आकाशवाणी हुयी कि’ जिस बहन को तुम इतना प्यार करते हो ,इसी की आठवीं संतान तुम्हारी मृत्यु का कारण होगी ।’ यह सुनकर कंस घबरा गया । वह देवकी के पति वासुदेव  को मारने को तत्पर हो गया ।  देवकी के बहुत अनुनय- विनय करने के बाद भी कंस नही माना I अंत में देवकी द्वारा यह आश्वासन दिये जाने पर कि वह अपनी सभी होने वाली संतान उसे दे देंगी । इसके  बावजूद उसने दोनों को  कारागार में डाल दिया और कड़ा पहरा लगा दिया । उसने देवकी और वासुदेव की सात संतानो को बहुत ही बेरहमी से मार दिया । आठवीं संतान होने से पूर्व ऐसा उल्लेख मिलता  है कि भगवान् विष्णु जी ने वासुदेव को दर्शन दिए और कहा , ‘जो बालक उत्प्नन होगा उसे गोकुल में नन्द और यशोदा के यहाँ छोड़ कर उसकी पुत्री को ले आना ।’ वासुदेव ने वैसा ही किया । कहते है ,अमावस्या की आधी रात को पहरेदार सो रहे थे । कारागार के दरवाजे अपने आप खुल गए । घनघोर वर्षा के बीच बाढ़ की स्थिति उत्प्नन हो गयी थी । लेकिन कृष्ण के पैर का  स्पर्श करते ही पानी का स्तर कम हो गया । वासुदेव , कृष्ण को एक सूप में  रखकर गोकुल ले गये । वहाँ यशोदा के बगल में लिटा कर ,उनकी जन्मी कन्या को लेकर वापस कारागार ले आये । सुबह जब कंस आया । उसने उस कन्या को देवकी से छीनकर जैसे ही मारने के लिए पत्थर पर पटकना चाहा । वह आकाश की ओर उड़ गयी और बोली ,”तुझे मारने वाला जन्म ले चुका है ।’ कंस यह सुनकर विचलित हो गया  । उसने उस समय के जन्मे सभी बच्चों को मौत के घाट उतार दिये । कृष्ण को मारने के लिये उसने पूतना ,बकासुर जैसे कई राक्षसों को भेजा । जिसका श्री कृष्ण ने वध कर दिया ।

जन्माष्टमी का आयोजन और तैयारी :

मंदिरों में कृष्ण जन्म का आयोजन किया जाता है । सभी मंदिरों को सजाया जाता है । उसमें कान्हा का झूला लगाया जाता है । भक्तगण श्रद्धापूर्वक आते है और कान्हा को झूला झूलाते है । पूरा दिन भजन कीर्तन होता है । इस्कॉन मंदिर में भक्तगण की कतारों से ही अनुमान लगाया जा सकता है । उनमे कितना उत्साह है । बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है ।मटकी फोड़ने का भी आयोजन किया जाता है । जिसमे सभी युवा वर्ग बड़े उत्साह से इसमें भाग लेते है  । इसके साथ मथुरा वृन्दावन की शोभा तो देखते ही बनती है । कही  श्री कृष्ण के जीवन पर आधारित झाकियाँ सजाई जाती है तो कही उनपर रासलीला का आयोजन होता है । कान्हा के बाललीलाओ का चित्रण सभी की मुख्य पसंद होती है ।भक्तगण  दिन भर व्रत रखते है । उनके जन्म के उपरांत ही अन्न -जल और प्रसाद ग्रहण करते है । शाम से ही पूजा अंनुष्ठान और आरती प्रारम्भ हो जाती है । जो आधीरात तक चलता है । कई बच्चे अपने घरो में कृष्ण की लीलाओं की झाकियाँ सजाते है । पूरा माहौल कृष्ण के रंग में रंगा दिखायी देता है ।

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संदेश :

श्री कृष्ण  द्वारा दिया गया सन्देश भागवतगीता में संकलित है ।
वे कर्म करने की बात करते है, फल की चिंता न करो :

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि

श्री कृष्ण अच्छे और बुरे कर्मो को बताते है । अच्छे कर्म सफलता की ओर ले जाते है और बुरे कर्म विनाश की ओर ले जाते है ।

श्री कृष्ण में सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड समाया है । ऐसा कृष्ण ने बाल्यावस्था में अपनी माँ को दही दिखाने के बहाने मुख खोलकर दिखाया । अर्जुन को महाभारत के रणभूमि में अपना विराट रूप दिखाया । जिसमें उन्होंने संदेश दिया है कि सब कुछ उनमे ही समाया है ।

धर्म की रक्षा के लिए वे हमेशा तत्पर रहे । बुरे कर्म करने वालो को उन्होंने कभी भी बक्शा नही । चाहें वह शिशुपाल का विनाश हो या कंस का वध हो ।

उनके दोस्ती का उदाहरण से भी सभी परिचित होंगे । आज भी लोग कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को एक मिसाल के तौर पर याद करते है । उन्होने प्रेम को सर्वोपरि महत्व दिया । सूरदास के पद और दोहे से इसको बखूबी समझा जा सकता है ।

उनके अनुसार ,’मनुष्य को वतर्मान में रहना चाहिए । भूतकाल तो बीत गया । उसको हम बदल नही सकते । इसलिए बीते हुए समय को लेकर पश्चाताप नही करना चाहिए । वर्तमान हमारे पास है अगर वो ठीक होगा तो भविष्य अपने आप ठीक होगा । वर्तमान ही आगे भविष्य का निर्माण करता है । ‘

श्रीकृष्ण का जनमानस के सम्मुख असाधारण व्यक्तित्व ,उनके प्रेम और विरह का साकार रूप और भागवत गीता के ज्ञान का सन्देश उनके पूरे स्वरुप को महिमामय और महान बनाते है ।

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3 comments

  1. Anshu Srivastava says:

    Bal gopal ki jai .bahut hi achaaa ha.

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