Safalta kaise prapt kare : सफलता कैसे प्राप्त करे : How To Achieve Success In Hindi


सफलता कैसे प्राप्त करे : How To Achieve Success In  Hindi

बढ़ते कॉम्पिटीशन के दौर मे सफलता कैसे प्राप्त करे । आज हर व्यक्ति दौड़ रहा है। हमारा  लछ्य क्या है ? हम करना क्या चाहते है ? क्या  रूककर  हमने यह  विचारने का प्रयास किया ?  शायद  नहीं ।  अगर हम विचारना  शुरू कर दे तो यही से सफलता का प्रोसेस प्रारंभ होता है और विचारों के कार्यान्वयन (Implementation) को ही हम सफलता  के  रूप  मे देख सकते है। जैसे ही हमारे विचारने और उनके क्रियान्वयन मे गैप  होता है या साम्य नही होता तो असफलता हाथ लगती  है। वास्तव मे सफलता और असफलता को Interrelate  करके देखे तो महत्वपूर्ण तत्व सामने आते है। हमारे  सफल होने  के पीछे असफलता मे ही उसका कारक छुपा  होता है। यदि हम असफलता का कारण जान लेंगे तो सफलता तक पहुँचा जा सकता है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने असफलता का सामना न किया हो । मुंशी प्रेमचंद्र  प्राम्भ मे  नवाबराय  के नाम से लिखते थे। ” सोजे वतन” कहानीसंग्रह के प्रकाशन की उपरांत  उस समय की सरकार  यानि  अंग्रजो ने उनके संग्रह को नष्ट कर कर दिया था और वार्निंग दिया  कि आइंदा वे  लेखन कार्य नही करेगे।  इसके  कारण वे  बहुत  आहत हुये और अपने आप को असफ़ल मानने लगे थे।  बहुत दिनों तक उन्होंने लेखन कार्य बंद कर रखा था, लेकिन अपने क्रांतिकारी  विचारो और अपने कार्यो के प्रति समर्पित उन्होंने  अपना नाम change करके  प्रेमचंद्र के नाम से लिखना शुरु किया । आगे चलकर वे  हिंदी  साहित्य जगत के  सम्राट के रूप मे प्रसिद्ध हुये।


हमारा एक मित्र  राकेश सिंह P C S Examination  की  Preparation के लिये वाराणसी से इलाहाबाद स्टडी के लिये आया था । हर साल वह प्री क़्वालिफाई  कर लेता, लेकिन  Main मे रह जाता था। उसके पिताजी की तबियत भी खराब रहती थी। घर से भी वापस आने का दबाव था, इसके बावजूद  उसने हिम्मत नही हारी, अपनी कोशिश और अनवरत प्रयास जारी रखा। अपने लास्ट Attempt मे 12th Rank  के साथ राकेश ने exam qualify किया और अपने ही शहर वाराणसी मे  डीएसपी के पद पर सफलता हासिल किया I
हमारा लछ्य ही हमारी प्राथमिकता  होनी चाहिये। उठते -बैठते उसी के बारे मे सोचना यानि  पूरा  इन्वाल्मेंट बहुत जरुरी है। अनवरत कोशिश करते रहने से सफलता के  पथ पर अग्रसर हुआ जा सकता है , विवेकानंद ने भी कहा है कि ‘ तब तक उस कार्य मे लगे  रहो जब तक सफलता न मिल जाए।’

अपने लछ्य का निर्धारण  करते समय एक समय मे एक ही कार्य करना बेहतर होता है । इस संदर्भ  मे  डॉ हरिवंश राय  बच्चन की कविता कि निम्न पंक्तियां कारगर  है :
:मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवाला
‘किस पथ से जाऊँ? ‘ असमंजस में है वह भोलाभाला।
‘अलग अलग पथ बतलाते सब पर मै  ये बतलाता हूं ,
राह पकड़ तू एक चलाचल पा जाएगा  मधुशाला ।’
इस बात का ख्याल रखना अति आवश्यक है कि जो भी कार्य हम करे उसमे हमारी रूचि होनी चाहिये। अपने पसंद का कार्य चुनने से हम तनावमुक्त होते है , दबाव कम रहता है और काम को इंजॉय के साथ करते है। मशहूर सिंगर श्रेया  गोसाल को बचपन से ही गाने का शौक था ,चार साल की उम्र से ही उन्होंने क्लासिकल म्यूजिक सीखना प्राम्भ कर दिया था। सात साल की उम्र मे पहला स्टेज शो किया। इसके  बाद तो Zee  टीवी के  सा रे गा मा कार्यक्रम  मे सभी ने उनको देखा और सराहा, आज वो एक सफल गायिका के रूप मे प्रसिद्ध है ।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण तत्त्व हमारी सकारात्मक सोच और आत्मविश्श्वास का होना  अति आवश्यक है।  हमे अपने ऊपर पूरा विश्वास होना चाहिये कि जो कार्य हम कर रहे है वह सही दिशा में हो । इसके साथ ही समय का प्रबंधन भी ठीक प्रकार से होना चाहिए। एक सिस्टम के तहत काम करना बहुत जरूरी है ,यदि टीवी देखने बैठ गए या दोस्तों के साथ गप शप कर लिया  और अपने  टारगेट को कुछ समय के लिए छोड़ दिया । हमने सोचा  बचा हुआ कार्य कल  कर लेंगे । यह प्रव्रति आगे  बढ़ती जाती है और हम अपने  लछ्य से पिछड़ते जाते है । परिश्रम या मेहनत करते समय पूरी ईमानदारी से कार्यो को  किर्यान्वित  किया जाना चाहिये । हर दिन कुछ नया करने को  प्रेरित होना चाहिये। अपने अंदर लगातार इम्प्रूवमेंट करते रहना ही सफल व्यक्तित्व की पहचान होती  है ।


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